नई दिल्ली/भोपाल। टोल वसूली को लेकर Supreme Court of India ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि यदि किसी सड़क परियोजना पर निर्माण लागत से 4 से 6 गुना तक टोल वसूला जा चुका है, तो ऐसे टोल प्लाजा को जारी रखना उचित नहीं है और उन्हें रद्द किया जा सकता है।
यह टिप्पणी मध्य प्रदेश के **Dewas–Bhopal रोड से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की गई।
कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि कई मामलों में सड़क निर्माण की लागत की तुलना में कई गुना अधिक टोल वसूला जा चुका है। ऐसे में यदि प्रोजेक्ट की लागत पूरी तरह निकल चुकी है और उससे कई गुना वसूली हो चुकी है, तो टोल जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बचता।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सड़क परियोजनाओं में पारदर्शिता जरूरी है और टोल वसूली केवल उतनी ही अवधि तक होनी चाहिए जितनी तय नियमों में निर्धारित है।
देवास-भोपाल रोड का मामला
यह मामला मध्य प्रदेश के देवास-भोपाल मार्ग पर चल रहे टोल प्लाजा से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि सड़क निर्माण की लागत निकलने के बाद भी लंबे समय तक टोल वसूली जारी रखी गई, जिससे आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यदि वसूली लागत से कई गुना अधिक हो चुकी है, तो ऐसे टोल प्लाजा को बंद करने या निरस्त करने पर विचार किया जाना चाहिए।
आम लोगों को मिल सकती है राहत
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को देशभर के वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अगर इस सिद्धांत को व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है, तो कई जगहों पर लंबे समय से चल रहे टोल प्लाजा बंद हो सकते हैं।
सरकार और एजेंसियों को निर्देश
कोर्ट ने संबंधित एजेंसियों और सरकार को यह भी संकेत दिया कि टोल प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता, लागत और वसूली का सही हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि लोगों को अनावश्यक आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।
निष्कर्ष:
टोल वसूली को लेकर सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में बड़े बदलाव का कारण बन सकती है। अगर किसी प्रोजेक्ट में लागत से कई गुना वसूली हो चुकी है, तो ऐसे टोल प्लाजा को हटाने या निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।