साल 2026 में बैंकिंग और टैक्स नियमों को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। अब सेविंग अकाउंट में कैश जमा करने की सीमा और उस पर निगरानी को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं। इसका उद्देश्य काले धन और संदिग्ध लेन-देन पर रोक लगाना बताया जा रहा है।
सेविंग अकाउंट में कैश जमा करने की लिमिट
नियमों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति अपने सेविंग अकाउंट में एक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) के दौरान 10 लाख रुपये या उससे अधिक नकद जमा करता है, तो बैंक को इसकी जानकारी Income Tax Department को देनी होती है।
इसके बाद आयकर विभाग उस व्यक्ति की आय और कैश के स्रोत की जांच कर सकता है।
इन ट्रांजैक्शन पर भी रहती है नजर
बैंक और आयकर विभाग इन लेन-देन पर खास नजर रखते हैं:
- एक साल में 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा कैश जमा
- बड़े कैश ट्रांजैक्शन बार-बार होना
- घोषित आय से ज्यादा रकम का लेन-देन
अगर किसी व्यक्ति की आय के हिसाब से कैश जमा ज्यादा पाया जाता है, तो आयकर विभाग नोटिस भी भेज सकता है।
नियम तोड़ने पर क्या हो सकता है
अगर जमा की गई रकम का सही स्रोत नहीं बताया जा सका तो:
- आयकर विभाग जुर्माना और टैक्स लगा सकता है
- कुछ मामलों में भारी पेनल्टी भी लगाई जा सकती है
क्यों लागू किए गए सख्त नियम
सरकार का कहना है कि इन नियमों का मकसद टैक्स चोरी रोकना, संदिग्ध लेन-देन पर नजर रखना और बैंकिंग सिस्टम को पारदर्शी बनाना है।
👉 इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बैंक खाते में बड़ी नकद राशि जमा करते समय उसके सही दस्तावेज और स्रोत जरूर रखें, ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी न हो।