काबुल/इस्लामाबाद। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर बढ़ते तनाव ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। लगातार गोलाबारी, ड्रोन हमलों और झड़पों की खबरों के बीच दोनों ओर सैनिकों और आम नागरिकों की जान जाने की सूचनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में एक बड़ा सवाल उठ रहा था—क्या इस पूरे घटनाक्रम में भारत की कोई भूमिका है?
अब इस पर अफगान सरकार की ओर से स्पष्ट बयान सामने आया है।
“भारत का हाथ होने का दावा पूरी तरह झूठ”
अफगान सरकार के प्रवक्ता Zabihullah Mujahid ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनसे जब पूछा गया कि क्या भारत का इस्लामिक अमीरात या टीटीपी से कोई संबंध है और क्या मौजूदा तनाव के पीछे भारत की भूमिका है, तो उन्होंने इसे “बेबुनियाद और गुमराह करने वाला” बताया।
मুজाहिद ने कहा कि ऐसे दावे केवल राजनीतिक एजेंडा चलाने के लिए फैलाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, अफगानिस्तान के भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ सामान्य कूटनीतिक संबंध हैं और उसने कभी भी अपने देश को किसी अन्य राष्ट्र की प्रॉक्सी जंग का मैदान नहीं बनने दिया।
उन्होंने साफ कहा कि
- भारत से रिश्ते पाकिस्तान के खिलाफ नहीं हैं।
- पाकिस्तान से रिश्ते भारत के खिलाफ नहीं हैं।
- मौजूदा झगड़े के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह गलत है।
कतर से अफगानी विदेश मंत्री की बातचीत
इस बीच अफगानिस्तान के विदेश मंत्री Amir Khan Muttaqi ने कतर के विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री Mohammed bin Abdulaziz Al-Khulaifi से फोन पर चर्चा की।
अफगान विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मुत्तकी ने कहा कि अफगानिस्तान बातचीत के जरिए समाधान चाहता है, लेकिन यदि उसकी संप्रभुता, हवाई क्षेत्र या सीमाओं पर हमला होता है तो वह जवाब देना भी जानता है।
बातचीत में हालिया अफगान-पाक झड़पों और क्षेत्रीय हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। मुत्तकी ने दावा किया कि अफगान सुरक्षा बलों द्वारा उठाए गए कदम देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए थे और निर्धारित लक्ष्य हासिल किए गए।
कतर की ओर से स्थायी समाधान की जरूरत पर जोर दिया गया और कहा गया कि वह स्थिति को संभालने में सहयोग जारी रखेगा। दोनों देशों ने संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।
क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल
विश्लेषकों का मानना है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए चुनौती बन सकता है। हालांकि अफगान सरकार ने भारत की भूमिका से इनकार कर दिया है, लेकिन सीमा पर हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं।
आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास कितने सफल होते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी।