इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में एक नया भू-राजनीतिक प्रस्ताव रखा है, जिसे उन्होंने “हेक्सागन ऑफ अलायंसेज़” यानी छह देशों का गठबंधन बताया। इस योजना में भारत को एक केंद्रीय स्तंभ के रूप में शामिल किया गया है।
हेक्सागन गठबंधन क्या है?
- यह छह देशों का प्रस्तावित ब्लॉक है, जिसमें इजरायल, भारत, ग्रीस और साइप्रस को प्रमुख भूमिका दी गई है।
- नेतन्याहू ने इसे “रेडिकल शिया एक्सिस” के खिलाफ एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में पेश किया है।
- इसका मकसद मध्य-पूर्व और आसपास के क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग बढ़ाना है।
पाकिस्तान में खलबली क्यों?
- पाकिस्तान की संसद ने इस प्रस्ताव के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया है।
- इसे “मुस्लिम उम्माह की एकता और अखंडता के लिए खतरा” बताया गया।
- पाकिस्तान का आरोप है कि यह गठबंधन इस्लामी देशों को कमजोर करने और विभाजित करने की कोशिश है।
भारत की भूमिका
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान इस गठबंधन पर चर्चा होने की संभावना है।
- भारत को इस प्रस्ताव में एक “सेंट्रल पिलर” यानी मुख्य स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है।
- यह भारत-इजरायल संबंधों को और गहरा करने का संकेत है, खासकर रक्षा, तकनीक और व्यापार सहयोग के क्षेत्र में।
सुप्रीम संदेश
- पाकिस्तान ने इसे “एंटी-मुस्लिम उम्माह ब्लॉक” करार दिया है।
- वहीं इजरायल और भारत इसे क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए अहम मानते हैं।
👉 कुल मिलाकर, हेक्सागन गठबंधन एक नई भू-राजनीतिक पहल है, जिसमें भारत की भागीदारी पाकिस्तान को असहज कर रही है। यह आने वाले समय में एशिया और मध्य-पूर्व की शक्ति संतुलन की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।