‘मुस्लिम होने की वजह से नहीं मिला घर!’ सुप्रीम कोर्ट जज ने सुनाया बेटी की दोस्त का दर्द

नई दिल्ली/हैदराबाद: सुप्रीम कोर्ट के जज उज्जल भुइयां ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान समाज में मौजूद भेदभाव की ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी की एक मुस्लिम दोस्त को दिल्ली में मकान किराए पर लेने से सिर्फ उसकी धार्मिक पहचान की वजह से मना कर दिया गया।

घटना का खुलासा

  • जज भुइयां ने कहा कि उनकी बेटी की सहपाठी को मकान मालिक ने यह कहकर घर देने से इनकार कर दिया कि वह मुस्लिम है।
  • उन्होंने इसे उदाहरण बनाकर बताया कि संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक व्यवहार में बड़ा अंतर है।
  • यह घटना उन्होंने हैदराबाद में आयोजित “संवैधानिक नैतिकता और जिला न्यायपालिका की भूमिका” विषयक सेमिनार में साझा की।

जज का संदेश

  • न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि अदालतों को फैसले संवैधानिक सिद्धांतों के आधार पर देने चाहिए, न कि जनमत या सामाजिक पूर्वाग्रहों के आधार पर।
  • उन्होंने जोर दिया कि आज़ादी के 75 साल बाद भी समाज में धार्मिक और जातिगत भेदभाव की गहरी जड़ें मौजूद हैं।

सामाजिक प्रतिक्रिया

  • इस बयान ने सोशल मीडिया और कानूनी हलकों में बहस छेड़ दी है।
  • कई लोग इसे समाज में मौजूद वास्तविकताओं का आईना बता रहे हैं, वहीं कुछ का कहना है कि ऐसे मामलों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

👉 कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट जज का यह बयान हमें याद दिलाता है कि संवैधानिक आदर्श और सामाजिक व्यवहार में अभी भी दूरी है, जिसे पाटना जरूरी है।

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