मोदी सरकार के खिलाफ फैलाया गया एक और प्रोपेगेंडा सुप्रीम कोर्ट में टिक नहीं पाया। हाल ही में दायर की गई याचिका, जिसमें पसमांदा मुसलमानों को OBC का दर्जा देकर आरक्षण देने की मांग की गई थी, को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
मामला क्या था?
- सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में यह नैरेटिव फैलाया जा रहा था कि मोदी सरकार ने पसमांदा मुसलमानों को OBC दर्जा देकर आरक्षण देने का काम किया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि ऐसा कोई कदम सरकार की ओर से नहीं उठाया गया है।
- अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह की मांग का कोई कानूनी आधार नहीं है।
प्रोपेगेंडा की हवा निकली
- इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया कि अब तक जो आरोप लगाए जा रहे थे, वे सफेद झूठ थे।
- मोदी सरकार ने पसमांदा मुसलमानों को OBC दर्जा देने का कोई निर्णय नहीं लिया है।
- सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन सभी दावों को निराधार साबित करता है।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने एक बार फिर दिखा दिया कि राजनीतिक नैरेटिव और प्रोपेगेंडा को अदालत में टिकाना आसान नहीं है। यह मामला साबित करता है कि तथ्यों से परे फैलाए गए आरोप अंततः फुस्स हो जाते हैं।