बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नई चर्चा जोर पकड़ रही है—क्या सीमांचल क्षेत्र को अलग करके नया केंद्रशासित प्रदेश (Union Territory) बनाया जा सकता है? मुख्यमंत्री और राज्यपाल से जुड़े बदलावों के बीच इस मुद्दे पर सियासी हलचल तेज हो गई है और लोग यह भी जानना चाहते हैं कि आखिर भारत में नया राज्य या केंद्रशासित प्रदेश बनाने का नियम क्या है।
नया राज्य या UT बनाने का अधिकार किसके पास?
भारत के संविधान में Article 3 of the Constitution of India के तहत संसद को यह अधिकार दिया गया है कि वह नए राज्य बना सकती है या मौजूदा राज्यों की सीमाओं और नाम में बदलाव कर सकती है।
इस अनुच्छेद के अनुसार संसद:
- किसी राज्य के हिस्से को अलग कर नया राज्य बना सकती है।
- दो या अधिक राज्यों या उनके हिस्सों को मिलाकर नया राज्य बना सकती है।
- किसी राज्य की सीमा, क्षेत्रफल या नाम बदल सकती है।
प्रक्रिया कैसे शुरू होती है
नया राज्य या केंद्रशासित प्रदेश बनाने की प्रक्रिया आमतौर पर इस तरह होती है:
- राष्ट्रपति की सिफारिश से संसद में बिल पेश होता है।
- अगर प्रस्ताव किसी राज्य की सीमा या क्षेत्र को प्रभावित करता है, तो राष्ट्रपति उस बिल को संबंधित राज्य विधानसभा के पास राय लेने के लिए भेजते हैं।
- राज्य विधानसभा अपनी राय देती है, लेकिन उसकी सहमति जरूरी नहीं होती।
- इसके बाद संसद साधारण बहुमत से बिल पास कर नया राज्य या UT बना सकती है।
पहले भी हुए हैं बड़े बदलाव
भारत में राज्यों के नक्शे में कई बार बड़े बदलाव हुए हैं।
- 1956 में States Reorganisation Act, 1956 के जरिए भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन किया गया।
- 2019 में Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में बांटा गया।
सीमांचल पर क्यों हो रही चर्चा
बिहार का सीमांचल क्षेत्र—किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और अररिया—लंबे समय से पिछड़ेपन और विकास की कमी के मुद्दों को लेकर चर्चा में रहता है। कुछ राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से समय-समय पर इसे अलग प्रशासनिक इकाई बनाने की मांग उठती रही है।
👉 हालांकि फिलहाल सीमांचल को अलग राज्य या केंद्रशासित प्रदेश बनाने को लेकर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस जरूर तेज हो गई है।