नई दिल्ली, भारत। मिडिल ईस्ट में ईरान और इज़रायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया है, लेकिन भारत के लिए फिलहाल तेल और ईंधन की सप्लाई चिंता का विषय नहीं बन रही है।
📌 भारत के पास पर्याप्त तेल और ईंधन स्टॉक
सरकारी और उद्योग स्रोतों के अनुसार भारत के पास कच्चे तेल और तैयार पेट्रोल-डीजल का स्टॉक लगभग 6-8 हफ्तों (लगभग 40-45 दिनों) तक की मांग पूरा करने के लिए है, जो किसी भी अल्पकालिक सप्लाई बाधा को झेलने में मदद करेगा।
ये स्टॉक रेफिनर्स के डिपो, भूमिगत रणनीतिक भंडार और टैंकरों पर मौजूद तेल के रूप में देश में मौजूद हैं।
📌 पेट्रोल-डीजल के दाम में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं
सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस समय पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तुरंत कोई वृद्धि नहीं की जाएगी, क्योंकि उपलब्ध स्टॉक और अल्टरनेट सप्लाई चैनलों से संकट को नियंत्रित किया जा सकता है।
📌 तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ीं लेकिन असर सीमित
मिडिल इस्ट में तनाव के कारण ब्रेंट कच्चा तेल की कीमत 80 डॉलर से ऊपर चली गई है, जिससे वैश्विक बाज़ार में दबाव बना हुआ है। लेकिन भारत जैसे बड़े आयातक देश के पास पर्याप्त बफर होने से घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दामों पर फिलहाल बड़ा असर नहीं दिख रहा।
📌 दीर्घकालीन जोखिम अभी भी संभव
अगर होर्मुज जलडमरूह (Strait of Hormuz) लंबे समय तक बंद रहता है, तो सप्लाई रूट बाधित होने के कारण तेल कीमतें और ऊपर जा सकती हैं और आयात खर्च बढ़ सकता है। इसके लिए सरकार वैकल्पिक स्त्रोतों से तेल आयात करने की योजना पर काम कर रही है।
📌 निष्कर्ष:
ईरान-इजरायल युद्ध के बावजूद भारत के पास फिलहाल तेल और ईंधन की पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और पेट्रोल-डीजल के दाम में तुरंत वृद्धि की संभावना फिलहाल कम है। अगर वैश्विक तनाव बढ़ता है और सप्लाई चैन और अधिक प्रभावित होती है, तो भविष्य में दामों पर असर पड़ सकता है।