Mukul Roy Passes Away: बंगाल की राजनीति के चाणक्य का अंत

पूर्व रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय का सोमवार तड़के निधन हो गया। 71 वर्षीय रॉय ने कोलकाता के अपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने बताया कि उन्हें 1:30 बजे रात कार्डियक अरेस्ट हुआ था। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कई दिनों से कोमा में थे।

राजनीतिक सफर

  • मुकुल रॉय ने अपने करियर की शुरुआत युथ कांग्रेस से की थी।
  • 1998 में ममता बनर्जी के साथ मिलकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की और पार्टी के संस्थापक सदस्य बने।
  • वे लंबे समय तक TMC में ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगी रहे और पार्टी के नंबर दो नेता माने जाते थे।
  • 2012 में वे रेल मंत्री बने और केंद्र की राजनीति में भी अपनी पकड़ मजबूत की।
  • 2017 में मतभेदों के चलते उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामा, लेकिन बाद में फिर TMC में लौट आए।

क्यों कहे जाते थे “बंगाल की राजनीति के चाणक्य”?

  • मुकुल रॉय को संगठनात्मक कौशल और चुनावी रणनीति के लिए जाना जाता था।
  • उन्होंने TMC को बंगाल में जमीनी स्तर पर मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
  • ममता बनर्जी के साथ रहते हुए उन्होंने पार्टी को दिल्ली तक पहचान दिलाई।
  • उनकी रणनीतिक सोच और राजनीतिक चालों के कारण ही उन्हें “बंगाल की राजनीति का चाणक्य” कहा जाता था।

विरासत

मुकुल रॉय का निधन बंगाल की राजनीति के लिए एक बड़ा झटका है। वे न केवल एक कुशल रणनीतिकार थे बल्कि संगठन को मजबूत करने वाले नेता भी थे। उनकी राजनीतिक यात्रा ने बंगाल की सत्ता समीकरणों को कई बार बदलने में अहम योगदान दिया।

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